आंध्र प्रदेश के डीजीपी ने चंद्रबाबू नायडू को दी नसीहत, कहा- मीडिया में पत्र लिक न करें

चंद्रबाबू नायडू (फाइल फोटो)
– फोटो : एएनआई

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आंध्र प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गौतम सवांग ने मंगलवार को तेलुगु देशम पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू को एक पत्र लिखकर विवाद को हवा दे दी, जिसमें तथ्यों को सत्यापित किए बिना खुले पत्र लिखने से परहेज करने के लिए कहा गया है।

डीजीपी गौतम सवांग ने नेता प्रतिपक्ष चंद्रबाबू नायडू के पत्र का जवाब दिया है। डीजीपी ने पत्र में कहा कि हम कानून के अनुसार अपने कर्तव्यों का पालन कर रहे हैं। आप एक जिम्मेदार पद पर है। मीडिया को पत्र देने से पहले तथ्यों को परख लें तो ठीक होगा। डीजीपी ने इस पत्र में न्यायाधीश रामकृष्णा के भाई रामचंद्र पर किए गए हमले के तथ्यों का खुलासा किया है।

 

डीजीपी ने आगे कहा कि पूछताछ में पता चला कि प्रताप रेड्डी तेलुगु देशम पार्टी का कार्यकर्ता है। चंद्रबाबू जैसे आरोप लगा रहे हैं वैसे वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी ) के नेताओं का इस घटना से कोई लेना-देना नहीं है। डीजीपी ने कहा कि मामले की जांच जारी है। मदनपल्ले के डीएसपी मामले की जांच में तेजी से कर रहे हैं।

डीजीपी गौतम सवांग ने पत्र मे कहा कि ’27 सितंबर को शाम 4.30 बजे चित्तूर जिले के बी कोथाकोटा शहर में यह घटना हुई है। कार में जा रहे प्रताप रेड्डी और ठेला चला रहे व्यक्ति श्रीनिवास के साथ झगड़ा/विवाद हुआ। इस दौरान शराब के नशे में धुत रामचंद्र ने विवाद में हस्तक्षेप किया। इसी दौरान प्रताप रेड्डी और रामचंद्र के बीच झड़प हुई। स्थानीय लोगों ने तुरंत हस्तक्षेप करके दोनों को अलग किया। प्रताप रेड्डी के साथ हुए झड़प में रामचंद्र घायल हो गया। घायल रामचंद्र को तुरंत इलाज के लिए कोत्ताकोटा अस्पताल भेज दिया गया। चिकित्सा अधिकारी ने जांच पाया कि रामचंद्र शराब के नशे में हैं।’

 

डीजीपी ने आगे कहा कि ‘इसके बाद बेहतर इलाज के लिए रामचंद्र को मदनपल्ले अस्पताल में स्थानांतरित किया गया। हमने तुरंत रामचंद्र के शिकायत पर मामला दर्ज किया। गवाहों के बयान और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर रामचंद्र पर हमला करने वाले प्रताप रेड्डी को गिरफ्तार किया गया और अदालत में पेश किया गया। आरोपी प्रताप रेड्डी तेलुगु देशम पार्टी का कार्यकर्ता है।’

 

गौतम सवांग ने कहा कि ‘आपने पत्र में आरोप लगाया है कि वाईएसआरसीपी के नेताओं ने मारपीट किया है। हमारी जांच में पाया गया कि आपका आरोप सही नहीं है। बिना तथ्यों को जाने आप जैसे नेता को इस तरह के आरोप लगाना उचित नहीं है। मीडिया को पत्र जारी करने से पहले तथ्यों की जांच कर लेते तो ठीक होता।

उन्होंने कहा कि अगर टीडीपी प्रमुख के पास किसी भी व्यक्ति की संलिप्तता के बारे में संदेह का कोई आधार या कारण है, तो वह पुलिस विभाग को एक सीलबंद कवर में लिख सकते हैं और कानून के शासन को बनाए रखने और लागू करने में अपने वैध कर्तव्यों का निर्वहन करने में पुलिस की मदद कर सकते हैं।

चित्तूर की घटना पर, डीजीपी ने कहा कि “रामचंद्र को तेज प्रताप रेड्डी के साथ झड़प के दौरान नाक पर हल्की चोटें आईं। जांच में पता चला कि प्रताप रेड्डी टीडीपी के कट्टर समर्थक हैं। इसलिए, नायडू द्वारा लगाए गए आरोप कि यह वाईएसआरसीपी नेताओं द्वारा प्रायोजित एक हमला है, झूठा है।’

वहीं, टीडीपी के आधिकारिक प्रवक्ता कोम्मारेड्डी पट्टाभीराम ने चित्तूर की घटना के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय नायडू के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करने के लिए डीजीपी को गलत ठहराया।

उन्होंने कहा कि नायडू ने डीजीपी को केवल यह कहने के लिए लिखा था कि यह हमला विजयवाड़ा में न्यायाधीश दलिता महासभा को संबोधित करने के ठीक एक दिन बाद किया गया था, जिससे हमलावरों के राजनीतिक इरादों पर संदेह पैदा हो गया था।

टीडीपी नेता ने डीजीपी से वाईएसआरसीपी के नेतृत्व वाले मुख्यमंत्री वाईएस जगनमोहन रेड्डी के समक्ष पुलिस बल के स्वाभिमान को गिरवी नहीं रखने की अपील की।

आंध्र प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गौतम सवांग ने मंगलवार को तेलुगु देशम पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू को एक पत्र लिखकर विवाद को हवा दे दी, जिसमें तथ्यों को सत्यापित किए बिना खुले पत्र लिखने से परहेज करने के लिए कहा गया है।

डीजीपी गौतम सवांग ने नेता प्रतिपक्ष चंद्रबाबू नायडू के पत्र का जवाब दिया है। डीजीपी ने पत्र में कहा कि हम कानून के अनुसार अपने कर्तव्यों का पालन कर रहे हैं। आप एक जिम्मेदार पद पर है। मीडिया को पत्र देने से पहले तथ्यों को परख लें तो ठीक होगा। डीजीपी ने इस पत्र में न्यायाधीश रामकृष्णा के भाई रामचंद्र पर किए गए हमले के तथ्यों का खुलासा किया है।

 

डीजीपी ने आगे कहा कि पूछताछ में पता चला कि प्रताप रेड्डी तेलुगु देशम पार्टी का कार्यकर्ता है। चंद्रबाबू जैसे आरोप लगा रहे हैं वैसे वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी ) के नेताओं का इस घटना से कोई लेना-देना नहीं है। डीजीपी ने कहा कि मामले की जांच जारी है। मदनपल्ले के डीएसपी मामले की जांच में तेजी से कर रहे हैं।

डीजीपी गौतम सवांग ने पत्र मे कहा कि ’27 सितंबर को शाम 4.30 बजे चित्तूर जिले के बी कोथाकोटा शहर में यह घटना हुई है। कार में जा रहे प्रताप रेड्डी और ठेला चला रहे व्यक्ति श्रीनिवास के साथ झगड़ा/विवाद हुआ। इस दौरान शराब के नशे में धुत रामचंद्र ने विवाद में हस्तक्षेप किया। इसी दौरान प्रताप रेड्डी और रामचंद्र के बीच झड़प हुई। स्थानीय लोगों ने तुरंत हस्तक्षेप करके दोनों को अलग किया। प्रताप रेड्डी के साथ हुए झड़प में रामचंद्र घायल हो गया। घायल रामचंद्र को तुरंत इलाज के लिए कोत्ताकोटा अस्पताल भेज दिया गया। चिकित्सा अधिकारी ने जांच पाया कि रामचंद्र शराब के नशे में हैं।’
 

डीजीपी ने आगे कहा कि ‘इसके बाद बेहतर इलाज के लिए रामचंद्र को मदनपल्ले अस्पताल में स्थानांतरित किया गया। हमने तुरंत रामचंद्र के शिकायत पर मामला दर्ज किया। गवाहों के बयान और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर रामचंद्र पर हमला करने वाले प्रताप रेड्डी को गिरफ्तार किया गया और अदालत में पेश किया गया। आरोपी प्रताप रेड्डी तेलुगु देशम पार्टी का कार्यकर्ता है।’

 

गौतम सवांग ने कहा कि ‘आपने पत्र में आरोप लगाया है कि वाईएसआरसीपी के नेताओं ने मारपीट किया है। हमारी जांच में पाया गया कि आपका आरोप सही नहीं है। बिना तथ्यों को जाने आप जैसे नेता को इस तरह के आरोप लगाना उचित नहीं है। मीडिया को पत्र जारी करने से पहले तथ्यों की जांच कर लेते तो ठीक होता।

उन्होंने कहा कि अगर टीडीपी प्रमुख के पास किसी भी व्यक्ति की संलिप्तता के बारे में संदेह का कोई आधार या कारण है, तो वह पुलिस विभाग को एक सीलबंद कवर में लिख सकते हैं और कानून के शासन को बनाए रखने और लागू करने में अपने वैध कर्तव्यों का निर्वहन करने में पुलिस की मदद कर सकते हैं।

चित्तूर की घटना पर, डीजीपी ने कहा कि “रामचंद्र को तेज प्रताप रेड्डी के साथ झड़प के दौरान नाक पर हल्की चोटें आईं। जांच में पता चला कि प्रताप रेड्डी टीडीपी के कट्टर समर्थक हैं। इसलिए, नायडू द्वारा लगाए गए आरोप कि यह वाईएसआरसीपी नेताओं द्वारा प्रायोजित एक हमला है, झूठा है।’

वहीं, टीडीपी के आधिकारिक प्रवक्ता कोम्मारेड्डी पट्टाभीराम ने चित्तूर की घटना के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय नायडू के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करने के लिए डीजीपी को गलत ठहराया।

उन्होंने कहा कि नायडू ने डीजीपी को केवल यह कहने के लिए लिखा था कि यह हमला विजयवाड़ा में न्यायाधीश दलिता महासभा को संबोधित करने के ठीक एक दिन बाद किया गया था, जिससे हमलावरों के राजनीतिक इरादों पर संदेह पैदा हो गया था।

टीडीपी नेता ने डीजीपी से वाईएसआरसीपी के नेतृत्व वाले मुख्यमंत्री वाईएस जगनमोहन रेड्डी के समक्ष पुलिस बल के स्वाभिमान को गिरवी नहीं रखने की अपील की।

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